Wednesday, 4 February 2026

किताबों की जगह झाड़ू थामे मासूम! हरख के स्कूल में बाल अधिकारों का कत्ल, भ्रष्ट तंत्र में जिंदा हिटलर : निहाल अहमद सिद्दीकी का शिक्षा विभाग पर तीखा प्रहार, जांच रिपोर्ट पर उठे गंभीर सवाल, सच दबाने की कोशिश या सुविधा शुल्क का खेल?

 


प्राइम भारत न्यूज 

रिपोर्ट_ मोहम्मद अहमद

बाराबंकी। जनपद के हरख ब्लॉक स्थित एक प्राथमिक विद्यालय में बच्चों से सफाई कराए जाने का वायरल वीडियो सामने आने के बाद शिक्षा विभाग की संवेदनहीनता और कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। वीडियो में नौनिहाल बच्चे हाथों में किताब नहीं, बल्कि झाड़ू-पोंछा लिए दिखाई दे रहे हैं, जो बाल अधिकार कानूनों और शिक्षा के मूल उद्देश्य की खुली अवहेलना है। इस मामले को लेकर भारतीय किसान मजदूर यूनियन (दशहरी) संगठन ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन जांच अधिकारी की रिपोर्ट को संगठन ने “झूठ का पुलिंदा” करार दिया है। रिपोर्ट में यह तर्क दिया गया कि ग्राम पंचायत में आठ माह से सफाई कर्मी की तैनाती नहीं है और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी की अनुमति से बच्चों से सफाई कराई गई। यूनियन का कहना है कि यह तर्क न केवल अमानवीय है, बल्कि बच्चों के मौलिक अधिकारों पर सीधा हमला भी है।


(इनसेट)


*“बच्चों का भविष्य किताबों से बनता है, झाड़ू से नहीं” : निहाल अहमद सिद्दीकी*


बाराबंकी। संगठन के प्रदेश सचिव/जिला अध्यक्ष निहाल अहमद सिद्दीकी ने शिक्षा विभाग पर तीखा हमला बोलते हुए कहा “यह शिक्षा व्यवस्था नहीं, बल्कि एक विकलांग और असंवेदनशील तंत्र है, जहां भ्रष्ट अफसरों में आज भी हिटलर जिंदा है। बच्चों से सफाई कराना शिक्षा नहीं, अपराध है।” उन्होंने कहा कि सरकार योजनाओं और बाल सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। रिपोर्ट में किसान यूनियन से सफाई में सहयोग मांगने की बात लिखना विभागीय विफलता और गैर-जिम्मेदारी का सबसे बड़ा प्रमाण है।


(इनसेट)


*न्यायालय की चेतावनी*


बाराबंकी। मामले में मौजूद एडवोकेट राहुल मिश्रा ने साफ शब्दों में कहा, यह बच्चों के मौलिक अधिकारों का सीधा हनन है। यदि जिम्मेदार अधिकारियों पर तत्काल कार्रवाई नहीं हुई तो हम न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे।”


(इनसेट)


*शिकायत के बाद दबाव बनाने का आरोप*


बाराबंकी। यूनियन द्वारा जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपे जाने के कुछ ही देर बाद, जिस जांच अधिकारी के खिलाफ शिकायत की गई थी, उसी का फोन शिकायतकर्ता को आना और मौके पर बुलाने का दबाव बनाना पूरे प्रकरण को संदेह के घेरे में खड़ा करता है।

शिकायतकर्ता पर “सही आख्या” देने का दबाव बनाना यह संकेत देता है कि कहीं न कहीं सुविधा शुल्क का खेल चल रहा है। जिस अधिकारी पर सवाल उठे हों, उसी को दोबारा जांच सौंपना उच्चाधिकारियों की भूमिका पर भी प्रश्नचिन्ह लगाता है।


(इनसेट)


*एफआईआर की मांग*


बाराबंकी। भारतीय किसान मजदूर यूनियन ने प्रधानाचार्य और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि यदि यह मामला भी फाइलों में दबा दिया गया, तो यह बच्चों के भविष्य के साथ सबसे बड़ा धोखा होगा।

अब सवाल यह है। क्या शिक्षा विभाग अपनी गलती स्वीकार कर दोषियों पर कार्रवाई करेगा? या फिर यह मामला भी कागजों में दफन कर दिया जाएगा? इस अवसर पर सीनियर एडवोकेट मुकेश चंद वर्मा, सुशील कुमार, दिलशाद हुसैन, मयंक रावत एडवोकेट, अलीम, नियाज अंसारी, मुकेश कुमार, अजय वर्मा, जियाउद्दीन, शुभम ठाकरे, वैस सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

तेज़ तर्रार पुलिसिंग की मिसाल: प्रभारी निरीक्षक अजय कुमार त्रिपाठी की सूझबूझ से नहर में कूदी युवती की बची जान

 

 

प्राइम भारत न्यूज/मोहम्मद अहमद

देवा, बाराबंकी। थाना देवा क्षेत्र में पुलिस की सतर्कता, त्वरित कार्रवाई और मानवीय संवेदनशीलता ने एक बार फिर साबित कर दिया कि सजग नेतृत्व हो तो असंभव भी संभव हो जाता है। दिनांक 03 फरवरी 2026 की रात्रि को सूचना मिली कि थाना देवा क्षेत्रान्तर्गत एक 22 वर्षीय युवती नहर में कूद गई है। सूचना मिलते ही देवा पुलिस हरकत में आ गई और बिना एक पल गंवाए मौके पर पहुंचकर साहसिक रेस्क्यू अभियान चलाया गया। प्रभारी निरीक्षक अजय कुमार त्रिपाठी के कुशल नेतृत्व में पुलिस टीम ने तत्परता दिखाते हुए युवती को नहर से सुरक्षित बाहर निकाला और तत्काल सीएचसी देवा पहुंचाया। जहां चिकित्सकीय उपचार के उपरांत युवती की हालत सामान्य होने पर उसे परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया। इस सराहनीय और मानवीय कार्य में प्रभारी निरीक्षक अजय कुमार त्रिपाठी, महिला आरक्षी शीतल सिंह, महिला आरक्षी नीता तोमर तथा कांस्टेबल जयंत सिंह की भूमिका विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। घटना के बाद युवती के परिजनों ने पुलिस टीम की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए कहा कि यदि पुलिस समय पर नहीं पहुंचती तो अनहोनी हो सकती थी। परिजनों ने प्रभारी निरीक्षक अजय कुमार त्रिपाठी की तेज़ तर्रार, संवेदनशील और जनहितैषी कार्यशैली को सलाम किया।प्रभारी निरीक्षक अजय कुमार त्रिपाठी की प्रभावी कमान में देवा पुलिस न केवल अपराध नियंत्रण में बल्कि मानवीय कर्तव्यों के निर्वहन में भी लगातार मिसाल कायम कर रही है। यह घटना देवा पुलिस की तत्परता, साहस और सेवा भाव का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आई है, जिसने एक परिवार की खुशियां लौटाईं और पुलिस-जनविश्वास को और मजबूत किया। देवा पुलिस: सुरक्षा भी, संवेदना भी?

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