प्राइम भारत न्यूज
रिपोर्ट_ अवनीश गुप्ता (लक्की)
बाराबंकी। जिला न्यायालय परिसर मंगलवार दोपहर उस समय तनाव और अफरा-तफरी का केंद्र बन गया, जब सैकड़ों अधिवक्ता धर्मांतरण से जुड़े एक संवेदनशील प्रकरण को लेकर अचानक आक्रोशित हो उठे। निबंधन कार्यालय के पास स्थित अधिवक्ता जफर हयात के चैंबर में आग लगा दी गई, जिससे पूरे परिसर में धुआं फैल गया और भगदड़ जैसी स्थिति बन गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घटना लगभग तीन बजे की है। अधिवक्ता श्रवण सिंह, अमित शुक्ला और आशीष राठौर के नेतृत्व में बड़ी संख्या में वकील एकत्र हुए और सीधे संबंधित चैंबर तक पहुंच गए। देखते ही देखते चैंबर में आग लगा दी गई। आग की लपटों और धुएं से न्यायालय परिसर में दहशत का माहौल बन गया तथा कामकाज प्रभावित हुआ।
प्रदर्शनकारी वकीलों का आक्रोश मुख्य रूप से अधिवक्ता कमर हयात इदरीसी पर केंद्रित बताया जा रहा है, जो कोतवाली नगर क्षेत्र के आजादनगर निवासी हैं। उनके खिलाफ गोमतीनगर थाने में गंभीर आरोप दर्ज होने की चर्चा है—जिनमें युवतियों को नौकरी का झांसा देकर शोषण, आपत्तिजनक वीडियो बनाने और उन्हें वायरल या बेचने जैसे आरोप शामिल बताए जा रहे हैं। आंदोलनरत अधिवक्ताओं का आरोप है कि इन कथित कृत्यों में उनके भाई जफर हयात की भी संलिप्तता हो सकती है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।
प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि संबंधित अधिवक्ताओं को जिला बार एसोसिएशन से तत्काल निलंबित किया जाए, ताकि अधिवक्ता समुदाय की गरिमा और न्याय व्यवस्था की साख बनी रहे।
इस संबंध में जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष नरेंद्र सिंह वर्मा ने दूरभाष पर बताया कि वे उस समय कानपुर में एक पारिवारिक कार्यक्रम में थे और उन्हें घटना की विस्तृत जानकारी नहीं मिल सकी है। उन्होंने कहा कि यदि कोई औपचारिक शिकायत या प्रस्ताव प्राप्त होता है, तो बार की कार्यकारिणी की बैठक बुलाकर नियमानुसार निर्णय लिया जाएगा।
आगजनी की घटना के बाद न्यायालय परिसर में देर तक तनाव बना रहा। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल की अतिरिक्त तैनाती की गई। यह घटना अधिवक्ता समुदाय के भीतर उभरते आक्रोश और न्यायिक परिसर में अनुशासन व नैतिकता से जुड़े गंभीर प्रश्नों को फिर से उजागर करती है।







