प्राइम भारत न्यूज
रिपोर्ट_ मोहम्मद अहमद
बाराबंकी। जनपद के हरख ब्लॉक स्थित एक प्राथमिक विद्यालय में बच्चों से सफाई कराए जाने का वायरल वीडियो सामने आने के बाद शिक्षा विभाग की संवेदनहीनता और कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। वीडियो में नौनिहाल बच्चे हाथों में किताब नहीं, बल्कि झाड़ू-पोंछा लिए दिखाई दे रहे हैं, जो बाल अधिकार कानूनों और शिक्षा के मूल उद्देश्य की खुली अवहेलना है। इस मामले को लेकर भारतीय किसान मजदूर यूनियन (दशहरी) संगठन ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन जांच अधिकारी की रिपोर्ट को संगठन ने “झूठ का पुलिंदा” करार दिया है। रिपोर्ट में यह तर्क दिया गया कि ग्राम पंचायत में आठ माह से सफाई कर्मी की तैनाती नहीं है और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी की अनुमति से बच्चों से सफाई कराई गई। यूनियन का कहना है कि यह तर्क न केवल अमानवीय है, बल्कि बच्चों के मौलिक अधिकारों पर सीधा हमला भी है।
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*“बच्चों का भविष्य किताबों से बनता है, झाड़ू से नहीं” : निहाल अहमद सिद्दीकी*
बाराबंकी। संगठन के प्रदेश सचिव/जिला अध्यक्ष निहाल अहमद सिद्दीकी ने शिक्षा विभाग पर तीखा हमला बोलते हुए कहा “यह शिक्षा व्यवस्था नहीं, बल्कि एक विकलांग और असंवेदनशील तंत्र है, जहां भ्रष्ट अफसरों में आज भी हिटलर जिंदा है। बच्चों से सफाई कराना शिक्षा नहीं, अपराध है।” उन्होंने कहा कि सरकार योजनाओं और बाल सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। रिपोर्ट में किसान यूनियन से सफाई में सहयोग मांगने की बात लिखना विभागीय विफलता और गैर-जिम्मेदारी का सबसे बड़ा प्रमाण है।
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*न्यायालय की चेतावनी*
बाराबंकी। मामले में मौजूद एडवोकेट राहुल मिश्रा ने साफ शब्दों में कहा, यह बच्चों के मौलिक अधिकारों का सीधा हनन है। यदि जिम्मेदार अधिकारियों पर तत्काल कार्रवाई नहीं हुई तो हम न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे।”
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*शिकायत के बाद दबाव बनाने का आरोप*
बाराबंकी। यूनियन द्वारा जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपे जाने के कुछ ही देर बाद, जिस जांच अधिकारी के खिलाफ शिकायत की गई थी, उसी का फोन शिकायतकर्ता को आना और मौके पर बुलाने का दबाव बनाना पूरे प्रकरण को संदेह के घेरे में खड़ा करता है।
शिकायतकर्ता पर “सही आख्या” देने का दबाव बनाना यह संकेत देता है कि कहीं न कहीं सुविधा शुल्क का खेल चल रहा है। जिस अधिकारी पर सवाल उठे हों, उसी को दोबारा जांच सौंपना उच्चाधिकारियों की भूमिका पर भी प्रश्नचिन्ह लगाता है।
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*एफआईआर की मांग*
बाराबंकी। भारतीय किसान मजदूर यूनियन ने प्रधानाचार्य और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि यदि यह मामला भी फाइलों में दबा दिया गया, तो यह बच्चों के भविष्य के साथ सबसे बड़ा धोखा होगा।
अब सवाल यह है। क्या शिक्षा विभाग अपनी गलती स्वीकार कर दोषियों पर कार्रवाई करेगा? या फिर यह मामला भी कागजों में दफन कर दिया जाएगा? इस अवसर पर सीनियर एडवोकेट मुकेश चंद वर्मा, सुशील कुमार, दिलशाद हुसैन, मयंक रावत एडवोकेट, अलीम, नियाज अंसारी, मुकेश कुमार, अजय वर्मा, जियाउद्दीन, शुभम ठाकरे, वैस सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।








