बाराबंकी के बंकी कस्बे में प्राचीन सार्वजनिक धरोहर पर कब्जे का मामला; अधिवक्ता राहुल मिश्रा ने राजस्व संहिता-2006 व IPC की धाराओं का हवाला देकर कार्रवाई की मांग की
प्राइम भारत न्यूज
रिपोर्ट_ ऋषभ सैनी
बाराबंकी, संवाददाता।
जनपद के तहसील नवाबगंज अंतर्गत कस्बा बंकी के उत्तर टोला क्षेत्र में स्थित प्राचीन “घल-घलउव्वा कुआं” को कथित रूप से ध्वस्त कर उस पर अवैध तरीके से मकान व दुकान निर्माण किए जाने का मामला सामने आया है। इस संबंध में सिविल कोर्ट बाराबंकी के अधिवक्ता राहुल मिश्रा ने आईजीआरएस (IGRS) पोर्टल के माध्यम से शिकायत दर्ज कराते हुए प्रशासन से जांच व कार्रवाई की मांग की है।
शिकायत में कहा गया है कि उक्त कुआं लंबे समय से क्षेत्र की सार्वजनिक धरोहर रहा है और स्थानीय लोगों के उपयोग में आता रहा है। क्षेत्रवासियों के अनुसार, पूर्व में इस स्थल पर सरकारी डाकघर की पोस्ट भी संचालित होती थी, जिससे इसके सार्वजनिक एवं सरकारी स्वरूप की पुष्टि होती है।
आरोप है कि उत्तर टोला निवासी मोहम्मद सुहैल ने कथित रूप से उक्त ऐतिहासिक कुएं को ध्वस्त कर दिया और उस भूमि पर अवैध रूप से निजी मकान व दुकान का निर्माण कर लिया। शिकायतकर्ता का कहना है कि यह कृत्य न केवल सरकारी भूमि पर अतिक्रमण है, बल्कि क्षेत्र की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहर को क्षति पहुंचाने जैसा गंभीर मामला भी है।
शिकायत में उल्लेख किया गया है कि उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता-2006 की धारा 67 के अंतर्गत सरकारी भूमि पर किए गए अतिक्रमण को हटाने का प्रावधान है। वहीं, भारतीय दंड संहिता की धारा 425 के तहत सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना दंडनीय अपराध है। इसके अतिरिक्त, यदि उक्त स्थल पुरातात्विक महत्व का पाया जाता है, तो प्राचीन स्मारक एवं पुरातात्विक स्थल एवं अवशेष अधिनियम-1958 के प्रावधान भी लागू हो सकते हैं।
अधिवक्ता राहुल मिश्रा ने प्रशासन से मांग की है कि प्रकरण की राजस्व अभिलेखों के आधार पर जांच कराते हुए स्थलीय निरीक्षण कराया जाए। यदि भूमि सरकारी अथवा सार्वजनिक धरोहर के रूप में दर्ज पाई जाए, तो अवैध निर्माण को हटाकर भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया जाए। साथ ही, संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध विधिक कार्रवाई करते हुए प्राथमिकी दर्ज की जाए।
इसके अतिरिक्त, राजस्व विभाग, नगर निकाय, डाक विभाग तथा पुरातत्व विभाग को प्रकरण से अवगत कराते हुए ऐतिहासिक स्थल के संरक्षण एवं पुनर्स्थापन की दिशा में भी आवश्यक कदम उठाने की मांग की गई है।
फिलहाल इस प्रकरण में प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। शिकायत पर जांच के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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