Saturday, 19 July 2025

बाराबंकी: जिला सरकारी अस्पताल में अल्ट्रासाउंड डॉक्टरों की भारी कमी, गर्भवती महिलाओं को हो रही भारी परेशानी


 

     प्राइम भारत न्यूज

न्यूज डेस्क_ उस्मान चौधरी 


बाराबंकी। सरकारी जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल — जिला महिला चिकित्सालय और पुरुष चिकित्सालय — में अल्ट्रासाउंड विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी से मरीजों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा असर गर्भवती महिलाओं पर पड़ रहा है, जिन्हें समय पर अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं मिल पा रही।

महिला अस्पताल में हर दिन बड़ी संख्या में गर्भवती महिलाएं जांच के लिए आती हैं, मगर अल्ट्रासाउंड विशेषज्ञ न होने के कारण अधिकतर को या तो घंटों इंतजार करना पड़ता है या फिर निराश होकर वापस लौटना पड़ता है। महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. प्रदीप सिंह खुद अल्ट्रासाउंड करने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं, मगर एक सीमित समय और संसाधनों में वह केवल लगभग 80से लगभग 90 मरीजों का ही अल्ट्रासाउंड हो जाता है

दूसरी ओर, पुरुष अस्पताल में स्थिति और भी चिंताजनक है। यहां एकमात्र अल्ट्रासाउंड तकनीशियन प्रशिक्षणरत लड़की है, जो अपनी सुविधा के अनुसार काम करती है और जब चाहे छुट्टी पर चली जाती है। मरीजों को लंबी कतारों और अनिश्चित प्रतीक्षा का सामना करना पड़ रहा है।

स्थानीय जनता में आक्रोश स्थानीय लोगों और मरीजों में इस लापरवाही को लेकर काफी नाराज़गी है। लोगों का कहना है कि जब जिला स्तर के अस्पतालों में ही बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल रहीं, तो फिर छोटे कस्बों और गांवों की हालत का अंदाज़ा लगाया जा सकता है।

अब सवाल यह उठता है कि स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक और स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारी इस गंभीर समस्या पर कब ध्यान देंगे? क्या बाराबंकी की जनता को यूं ही स्वास्थ्य सेवाओं की कमी का शिकार होना पड़ेगा?

जनता की मांग है कि तत्काल प्रभाव से योग्य अल्ट्रासाउंड विशेषज्ञों की नियुक्ति की जाए ताकि गर्भवती महिलाओं और अन्य मरीजों को समय पर उचित जांच और इलाज मिल सके।

Wednesday, 16 July 2025

पैसों की भूख ने छीन ली बीटेक छात्र की ज़िंदगी, ब्लैकमेलिंग से टूटकर किया सुसाइड, प्रेमिका के परिजनों पर लगाए संगीन आरोप


 

    प्राइम भारत न्यूज 

न्यूज डेस्क_ मोहम्मद अहमद 


मां की पुकार: “बेटे को तो खो दिया, अब इंसाफ तो दिलाइए...रात भर नगर कोतवाली के बाहर बैठी रही मां, मगर पुलिस रही बेपरवाह


बाराबंकी। प्यार की आड़ में पैसों की भूख ने एक और मासूम की ज़िंदगी निगल ली। बीटेक का छात्र तुषार वर्मा लगातार ब्लैकमेलिंग और धमकियों से इस कदर टूट गया कि उसने अपनी जान दे दी। अंतिम सांसों तक उसने न्याय की गुहार लगाई—अपनी मौत से ठीक पहले एक वीडियो बनाया, जिसमें सीधे-सीधे प्रेमिका आराध्या वर्मा और उसके परिजनों को जिम्मेदार ठहराया। मगर अफ़सोस, वीडियो और आंखों में बेटे की तस्वीर लेकर रात भर थाने के बाहर बैठी मां की फरियाद भी पुलिस के कानों तक नहीं पहुंची। ब्लैकमेलिंग की पराकाष्ठा—30 लाख की मांग, जान से मारने की धमकी मृतक की मां सुषमा वर्मा ने बताया कि उनके बेटे तुषार को प्रेमिका आराध्या वर्मा और उसके पिता सतीश वर्मा समेत परिवार के अन्य सदस्यों ने लगातार फर्जी मुकदमे में फंसाने और बदनाम करने की धमकी दी। पहले डर के मारे 4-5 लाख रुपये दिए भी गए, मगर मांग बढ़ती गई और 30 लाख तक पहुंच गई। वीडियो में दर्ज हैं आख़िरी लफ्ज़—"मुझसे अब और नहीं सहा जाता..."15/16 जुलाई की रात तुषार ने अपनी जान देने से पहले वीडियो रिकॉर्ड किया। वीडियो में उसने कहा कि लगातार हो रही प्रताड़ना और ब्लैकमेलिंग की वजह से वह आत्महत्या कर रहा है। "अगर मैंने कुछ किया तो मेरे पूरे परिवार को खत्म कर देंगे", ये शब्द तुषार ने मरने से पहले कैमरे में दर्ज किए। "कोतवाली में सिर्फ दीवारें सुनी गईं, मां की चीखें नहीं" पोस्टमार्टम के बाद भी जब पुलिस ने FIR दर्ज नहीं की तो तुषार की मां सुषमा वर्मा आधी रात तक नगर कोतवाली के बाहर बैठी रहीं। हाथ में बेटे की आख़िरी वीडियो की कॉपी और आंखों में आंसुओं का सैलाब था। बार-बार पुलिस से एक ही गुहार—"हमें इंसाफ चाहिए। बेटे की जान के दोषियों को सज़ा दो।" कानून के रखवालों की चुप्पी—न्याय की आस में भटक रहा परिवार, पूरा परिवार ग़म के साथ-साथ अब न्याय के लिए लड़ाई लड़ रहा है। दो बहनों का इकलौता भाई तुषार अब इस दुनिया में नहीं रहा। लेकिन सवाल ये है कि जब पीड़िता खुद गवाही के सबूतों के साथ दरवाज़े पर खड़ी हो, तो भी पुलिस FIR दर्ज करने में हिचक क्यों दिखा रही है? क्या पुलिस का यही काम है कि पीड़ित को रात भर थाने के बाहर बैठाए रखे? या फिर अपराधियों की सिफारिशें और दबाव, इंसाफ की राह में दीवार बन रहे हैं? अब समय आ गया है कि ऐसी घटनाओं में त्वरित कार्रवाई हो। वरना हर चुप्पी एक और मां की गोद उजाड़ देगी।

Saturday, 12 July 2025

नंद गोपाल गुप्ता 'नंदी' के पुनर्प्राप्त जन्मदिवस पर वैश्य समाज ने की विशेष पूजा—मुड़कटी देवी मंदिर में शिव अभिषेक कर मांगी लंबी उम्र की दुआ


 

  प्राइम भारत न्यूज 

न्यूज डेस्क_ ऋषभ सैनी 


बाराबंकी। उत्तर प्रदेश सरकार में औद्योगिक विकास, निर्यात प्रोत्साहन, एनआरआई एवं निवेश प्रोत्साहन मंत्री एवं वैश्य समाज के संरक्षक नंद गोपाल गुप्ता 'नंदी' के पुनर्प्राप्त जन्मदिवस के अवसर पर वैश्य समाज द्वारा भव्य आयोजन किया गया। इस मौके पर शहर के मुड़कटी देवी मंदिर में भगवान शिव का रुद्राभिषेक कर नंदी जी की दीर्घायु और उत्तम स्वास्थ्य की कामना की गई।

दरअसल, 12 जुलाई 2010 को प्रयागराज में शिव मंदिर की ओर जाते समय नंद गोपाल गुप्ता 'नंदी' पर बम से जानलेवा हमला हुआ था। इस घटना में उनके सुरक्षाकर्मी सहित दो लोगों की मृत्यु हो गई थी, जबकि मंत्री नंदी गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इस दर्दनाक घटना को वैश्य समाज नंदी जी का पुनर्जन्म मानता है और हर वर्ष इस दिन को पुनर्प्राप्त जन्मदिवस के रूप में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाता है।

इस वर्ष यह आयोजन बाराबंकी के मोहल्ला कानून गायन स्थित मुड़कटी देवी मंदिर में आयोजित किया गया। मंदिर में भगवान शिव का जलाभिषेक एवं दुग्धाभिषेक कर विशेष पूजा अर्चना की गई। समाज के सभी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने पूरे श्रद्धाभाव के साथ भाग लिया।

कार्यक्रम में वैश्य समाज जिला अध्यक्ष उत्तम कुमार गुप्ता उर्फ मुन्ना गुप्ता, महिला जिला अध्यक्ष लक्ष्मी गुप्ता, जिला महामंत्री बी. जी. गुप्ता, अधिवक्ता दिलीप गुप्ता, संयोजक ओम गुप्ता, पवन कुमार जैन, पवन कुमार वैश्य, श्रीकांत सोनी, पंकज गुप्ता पंकी, आदर्श गुप्ता, नमन गुप्ता, प्रांशु गुप्ता सहित  समाज के अन्य सैकड़ों सदस्य शामिल रहे।

कार्यक्रम के माध्यम से वैश्य समाज ने यह संदेश दिया कि अपने नेताओं के संघर्षों और जीवन के विशेष क्षणों को याद रखना हमारी संस्कृति की पहचान है। इस अवसर पर एकता, श्रद्धा और समर्पण का अद्भुत संगम देखने को मिला।

बाराबंकी: जिला अस्पताल की डायलिसिस यूनिट बदहाल, इलाज की जगह बढ़ रहा इंतजार


 

    प्राइम भारत न्यूज 

न्यूज डेस्क _ उस्मान चौधरी 


मशीनें बार-बार हो रही खराब, मरीजों को निजी सेंटर जाने की मजबूरी


बाराबंकी। जिला अस्पताल में किडनी मरीजों के लिए संचालित डायलिसिस यूनिट में अव्यवस्थाएं इस कदर हावी हैं कि अब यह सेवा जीवन रक्षक कम, परेशानी बढ़ाने वाली ज्यादा साबित हो रही है। मशीनें या तो खराब हैं या बार-बार दिक्कत देती हैं, जिससे मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा।जानकारी के अनुसार अस्पताल में कुल 8 डायलिसिस मशीनें हैं, जिनमें से अधिकांश समय-समय पर तकनीकी खराबी से जूझती रहती हैं। इनका संचालन एक निजी एजेंसी — संजीवनी कंपनी द्वारा किया जा रहा है, लेकिन तकनीकी टीम की लापरवाही और मशीनों की अनदेखी मरीजों पर भारी पड़ रही है। मरीजों की हालत गंभीर, खर्च उठा पाना मुश्किल अस्पताल में जब सेवा नहीं मिलती, तो मरीजों को मजबूरी में निजी सेंटरों का रुख करना पड़ता है। वहां एक बार की डायलिसिस पर तीन से पांच हजार रुपये तक का खर्च आता है। आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए यह बेहद कठिन है।


👉 व्यवस्था भी बेहाल

डायलिसिस यूनिट के भीतर पंखा, एसी और वेंटिलेशन जैसी मूलभूत सुविधाएं भी ठीक से उपलब्ध नहीं हैं। कई बार मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ता है, और जब नंबर आता है तो मशीन खराब निकलती है।


👉 प्रशासनिक हस्तक्षेप की दरकार

बार-बार शिकायतों के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। अस्पताल स्टाफ भी कई बार तकनीकी टीम की लापरवाही को लेकर नाराजगी जता चुका है। ऐसे में सवाल उठता है कि जिम्मेदार अधिकारी कब तक आंखें मूंदे रहेंगे?

अब जरूरत है कि जिलाधिकारी स्वयं मामले का संज्ञान लें, और डायलिसिस यूनिट की कार्यप्रणाली की समीक्षा करें।

यह सिर्फ एक व्यवस्था की बात नहीं, बल्कि उन सैकड़ों मरीजों के जीवन से जुड़ा मुद्दा है, जो हर हफ्ते इसी यूनिट पर आश्रित हैं।

Thursday, 10 July 2025

चलते ई-रिक्शा में चेन स्नैचिंग: सुरक्षा व्यवस्था की खुली पोल!


 

           प्राइम भारत न्यूज 

न्यूज डेस्क _ ऋषभ सैनी/अवनीश गुप्ता


💥 फाउंडेशन स्कूल के पास महिला से सोने की चेन लूटी, जिला अस्पताल में भी हो चुकी है बड़ी चोरी — अपराधियों के हौसले बुलंद, पुलिस बेखबर


बाराबंकी। शहर में चोरी और लूट की घटनाएं अब आम होती जा रही हैं। महिलाओं से चेन स्नैचिंग और बाइक चोरी जैसी वारदातें लगातार सामने आ रही हैं, लेकिन पुलिस-प्रशासन अब तक सिर्फ कागज़ी कार्रवाई तक सीमित नजर आ रहा है। गुरुवार रात कोतवाली क्षेत्र में फाउंडेशन स्कूल के पास एक महिला से चलते ई-रिक्शा में चेन स्नैचिंग की सनसनीखेज वारदात हुई।


उत्तराखंड निवासी सरला मौर्या, पत्नी शिव मौर्या, अपने दामाद योगेश मौर्या, निवासी आवास विकास कॉलोनी, के घर आई हुई थीं। शाम करीब 7 बजे वह पल्हरी चौराहे से ई-रिक्शा में सवार होकर घर जा रही थीं। पीड़िता के मुताबिक, जैसे ही रिक्शा फाउंडेशन स्कूल के पास पहुँचा, तभी सफेद रंग की बाइक से एक युवक आया और चलते रिक्शा से उनकी सोने की चेन झपटकर तेज़ी से फरार हो गया।पीड़िता ने थाना कोतवाली नगर में घटना की तहरीर दी है।

यह पहली घटना नहीं है। कुछ दिन पहले ही जिला अस्पताल में महिला से लाखों के जेवर टप्पेबाजों ने पार कर दिए थे, लेकिन अपराधियों का अब तक कोई सुराग नहीं लग सका।वहीं आवास विकास कॉलोनी में एक पत्रकार के परिजन के साथ भी चेन स्नैचिंग की वारदात हो चुकी है।इसके अलावा, अभी हाल ही में पल्हरी चौराहे के पास एक बाइक चोरी की घटना ने भी सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पुलिस की लचर गश्त और ढीली पकड़ ने अपराधियों को खुली छूट दे दी है। अब देखना होगा कि पुलिस कब तक इन घटनाओं को गंभीरता से लेकर कार्रवाई करेगी।



Wednesday, 9 July 2025

एक पेड़ मां के नाम" अभियान के तहत पत्रकारों ने किया वृक्षारोपण, पर्यावरण संरक्षण का लिया संकल्प


 
   प्राइम भारत न्यूज 
न्यूज डेस्क_ अवनीश गुप्ता 



बाराबंकी। "एक पेड़ मां के नाम" अभियान के अंतर्गत ग्वारी  रोड पर पत्रकारों ने एकजुट होकर वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। इस अभियान के दौरान पत्रकारों ने न सिर्फ पौधारोपण किया बल्कि यह भी संकल्प लिया कि वे लगाए गए हर पौधे की नियमित देखभाल करेंगे और इसे एक वृक्ष के रूप में विकसित होते देखेंगे।
कार्यक्रम में पत्रकार महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष संजय वर्मा 'पंकज' ने कहा कि, "वृक्ष केवल प्रकृति की शोभा नहीं, बल्कि जीवनदायिनी शक्ति हैं। हर व्यक्ति को कम से कम एक पेड़ अपनी मां के नाम पर जरूर लगाना चाहिए।"
वरिष्ठ पत्रकार नितेश मिश्रा ने इसे भावनात्मक जुड़ाव से जोड़ते हुए कहा कि जब हम किसी पौधे को मां के नाम समर्पित करते हैं, तो उसमें सेवा और संरक्षण की भावना अपने आप आ जाती है।
वहीं वरिष्ठ पत्रकार राहुल त्रिपाठी ने वृक्षों को अगली पीढ़ियों के लिए धरोहर बताया और कहा कि आज का यह छोटा प्रयास कल एक बड़े बदलाव का माध्यम बन सकता है।
इस अभियान में पत्रकार ऋषभ सैनी, मोहम्मद अहमद, अरशद जमाल, अवनीश गुप्ता, उस्मान चौधरी, सोहेल अंसारी और अंकित मिश्रा सहित कई पत्रकारों की उपस्थिति रही, जिन्होंने इस नेक कार्य में हिस्सा लेकर समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी का परिचय दिया।
वृक्षारोपण अभियान न केवल पर्यावरण के लिए एक आवश्यक कदम है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुंदर भविष्य की नींव भी रखता है। पत्रकारों का यह प्रयास निश्चित रूप से समाज में सकारात्मक संदेश देगा और अन्य लोगों को भी प्रेरित करेगा।


Sunday, 6 July 2025

नबीगंज की सड़कों ने खोल दी विकास के दावों की पोल, जनता बेहाल


 

    प्राइम भारत न्यूज 

न्यूज डेस्क_ मोहम्मद अहमद 


"शहर के मध्य में बसी बस्ती, सुविधाओं के लिए फिर भी तरसती — कब आएगा स्थायी समाधान?"


बाराबंकी। शहर के हृदयस्थल माने जाने वाले नबीगंज मोहल्ले की सड़कें इन दिनों आम जनमानस के लिए परेशानी का कारण बनी हुई हैं। एक ओर सरकार एवं स्थानीय निकायों द्वारा शहरी विकास के दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर नबीगंज जैसे क्षेत्रों की जमीनी हकीकत इन दावों की समीक्षा की मांग कर रही है।


नबीगंज, राहत नगर और आसपास के मोहल्लों में निवासरत नागरिकों ने बताया कि क्षेत्र में सड़कें लंबे समय से जर्जर स्थिति में हैं। बरसात के मौसम में यह सड़कें कीचड़ और जलभराव से इस कदर भर जाती हैं कि बच्चों का स्कूल जाना, बुजुर्गों का बाहर निकलना और बीमार व्यक्तियों को समय पर अस्पताल पहुंचाना चुनौती बन गया है।

स्थानीय नागरिकों — मोहम्मद असद खान, इरशाद, रिजवान, शाकिब, फिरोज, अब्दुल हाफिज आदि — का कहना है कि समस्याओं को लेकर वे कई बार संबंधित विभागों को अवगत करा चुके हैं, किंतु समाधान आज भी प्रतीक्षित है।


इससे इतर, कुछ नागरिकों द्वारा यह भी संकेत दिए गए कि कुछ क्षेत्रों में प्राथमिकता के आधार पर कार्य होते हैं, जबकि बाकी मोहल्लों की अनदेखी की जाती है। ऐसे में विकास कार्यों में समरसता एवं पारदर्शिता बनाए रखने की आवश्यकता अनुभव की जा रही है।


पूर्व में नगर निकाय से जुड़े पदाधिकारियों द्वारा सड़क निर्माण और ठेका प्रक्रिया को लेकर उठाए गए सवाल भी जन चर्चा का विषय बने रहे हैं। हालांकि इस पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है, फिर भी नागरिक उम्मीद कर रहे हैं कि भविष्य में कार्य प्रणाली में अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही देखने को मिलेगी।


नबीगंज की स्थिति यह स्पष्ट रूप से इंगित करती है कि नगर पालिका परिषद नवाबगंज के समक्ष शहरी बुनियादी ढांचे की बेहतरी एक बड़ी चुनौती है। नागरिकों ने जिलाधिकारी श्री शशांक त्रिपाठी से अपेक्षा की है कि वे स्वयं क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण कर आवश्यक निर्देश प्रदान करें, ताकि आमजन को राहत मिल सके।जनता का कहना है कि उनका विश्वास तब ही बहाल होगा, जब समस्याओं का समाधान फाइलों से निकलकर जमीन पर दिखाई देगा।




तेज रफ्तार का कहर, सड़क हादसे में वरिष्ठ पत्रकार अरशद जमाल गंभीर रूप से घायल

प्राइम भारत न्यूज रिपोर्ट_ मो अहमद बाराबंकी। जनपद के वरिष्ठ पत्रकार व राष्ट्रीय पत्रकार एकता संघ के वरिष्ठ जिला उपाध्यक्ष एवं समय न्यूज़ से ...